وللتدليل على ذلك، فإن موقعا مساحته 14 هكتارا في مدينة لوس أنجليس -
والذي يحوي منشأة "توين تاورز" الإصلاحية وسجن الرجال المركزي - يمكنه استيعاب 7 آلاف سجين تقريبا
उन्होंने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी नाम से नई पार्टी बनाने का ऐलान किया
है. रविवार को लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी की स्थापना होगी और साथ ही वो एक
बड़ी रैली का आयोजन भी कर रहे हैं.
2014 के आम चुनाव में भाजपा के टिकट पर लड़े राजकुमार सैनी उद्योगपति नवीन जिंदल को हराकर लोकसभा पहुंचे थे.
उन्होंने
जाट आरक्षण का खुलकर विरोध किया था और पिछले काफी समय से उन्होंने अपनी ही
पार्टी के साथ-साथ दूसरी राजनीतिक पार्टियों के ख़िलाफ़ भी मोर्चा खोल रखा
है.
तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति समय से पहले विधानसभा चुनाव की अटकलों के बीच रविवार को जनसभा का आयोजन कर रही है.
समय से पहले चुनाव के बारे में कोई आधिकारिक ख़बर नहीं आई है. ऐसे में
निगाहें मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव पर टिकी है कि
रविवार की सभा में वह क्या बोलेंगे.
उम्मीद की जा रही है कि रविवार को मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव विधानसभा भंग करने का ऐलान कर जल्द चुनाव का निर्णय ले सकते हैं.
बताया
जा रहा है कि बैठक के बाद कैबिनेट विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव पास
कर इसकी अनुशंसा राज्यपाल ई. एस. एल. नरसिम्हन से कर सकता है. निर्वाचन
आयोग अगर सहमत हो गया, तो यहां अन्य तीन राज्यों के साथ दिसंबर में ही
चुनाव हो सकते हैं. गस्त में जीएसटी कलेक्शन घटकर 93,960 करोड़ रुपये रहा. जुलाई में 96,483 करोड़ रुपए का टैक्स मिला था.
केंद्र
सरकार ने शनिवार को जीएसटी के आंकड़े जारी किए. वित्त मंत्रालय का मानना
है कि 21 जुलाई को जिन वस्तुओं पर जीएसटी कम किया गया उनकी बिक्री रुक गई.
क्योंकि, टैक्स में कटौती 27 जुलाई से लागू हुई.
लीबिया की राजधानी त्रिपोली में हवाई अड्डे की ओर जाने वाली सड़क पर चरमपंथी गुटों के बीच भीषण लड़ाई चल रही है.
अभी ये पता नहीं चल सका है कि संघर्ष में चरमपंथियों के कौन से गुट शामिल हैं.
आम
तौर पर राजधानी में संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाली सरकार का नियंत्रण
रहता है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में चरमपंथी गुटों को कब्जा है.
एशियन गेम्स का आज आखिरी दिन, भारत ने किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
इंडोनेशिया
में चल रहे 18वें एशियन गेम्स में शनिवार को दो और स्वर्ण पदक जीतकर अपने
पदकों की कुल संख्या 69 तक पहुंचा दिया जो बीते सभी संस्करणों की तुलना में
सबसे अधिक पदक है.
रविवार को एशियन गेम्स का आख़िरी दिन है लेकिन
रविवार की स्पर्धा में भारत की भागीदारी नहीं है. यानी एशियन गेम्स में
शनिवार को ही भारत का सफ़र ख़त्म हो गया है.
भारत ने इन खेलों में अपने सबसे अधिक स्वर्ण पदक जीतने की बराबरी की वहीं सर्वाधिक पदकों के मामले में उसने नया रिकॉर्ड कायम किया.
भारत
ने एशियन गेम्स के 18वें संस्करण में 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य के
साथ कुल 69 पदक जीते जबकि अपनी मेजबानी में 1951 में हुए पहले एशियन गेम्स
में भारतीय खिलाड़ियों ने 15 स्वर्ण, 16 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 51
पदक जीतकर तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया था.
कुल पदकों के मामले
में भी भारत ने 2010 एशियाई खेलों की पीछे छोड़ दिया. चीन के ग्वांगझो में
हुए 2010 एशियाई खेलों में भारत ने कुल 65 पदक जीते थे.
एशियन गेम्स के समापन समारोह के लिए महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी रामपाल को भारतीय दल का ध्वजवाहक चुना गया है.
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ग्लैंड की हार तय है और ये भी निश्चित है कि ये हार बड़ी होगी, लेकिन रनों की हार का ये आंकड़ा क्या होगा इस पर
अभी सिर्फ़ शर्त ही लगाई जा सकती है.
ट्रेंट ब्रिज में भारत जीत से
बस एक विकेट दूर है. इंग्लैंड ने दूसरी पारी में नौ विकेट पर 311 रन बनाए
हैं और जीत अब भी उससे 210 रन दूर है.
चौथे दिन जब तक जोस बटलर और
बेन स्टोक्स क्रीज पर थे तब तक लग रहा था कि इस टेस्ट में पाँचवें दिन के
लिए भी कुछ क्रिकेट बची होगी. लेकिन फिर 10 रनों के अंतराल पर चार अंग्रेज
बल्लेबाज़ पैवेलियन लौटे और मैच पूरी तरह से भारत की मुट्ठी में आ गया.किन बात करते हैं चौथे दिन के खेल के उन लम्हों की जब कप्तान विराट कोहली का कोई भी दांव काम नहीं कर रहा था.
बटलर और स्टोक्स भारतीय गेंदबाज़ों को बखूबी खेल रहे थे और जब तक पुरानी गेंद रही, उन्होंने कोहली एंड कंपनी को परेशान किए रखा.
ख़ास बात ये है कि बटलर और स्टोक्स उस वक्त बल्ले के साथ मैदान पर उतरे
थे, जब इंग्लैंड के चार बल्लेबाज़ आउट हो चुके थे और भारत ने अपना शिकंजा
कसा हुआ था.
बटलर ने 176 गेंदें खेली और 21 चौकों के साथ 106 रनों की बेहतरीन पारी खेली, वहीं स्टोक्स की जुझारू पारी का अंदाज़ा इस बात से
लगाया जा सकता है कि उन्होंने 187 गेंदें खेली और 62 रन बनाए, इस दौरान
उन्होंने सिर्फ़ चार मर्तबा ही गेंद को सीमा रेखा के बाहर भेजा.
ये बात सही है कि भारत इस मुक़ाबले में कभी भी बैकफुट पर नहीं था. बटलर
तब दो रन के निजी स्कोर पर थे जब बुमराह की गेंद बटलर के बल्ले से टकराते
हुए विकेट के पीछे उछली, लेकिन अपना पहला टेस्ट खेल रहे विकेटकीपर ऋषभ पंत
गलत अंदाज़ा लगा बैठे और बटलर को एक तरह से जीवनदान मिल गया. इसके बाद
कोहली ने हार्दिक पांड्या, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, रविचंद्रन अश्विन से
लेकर वापस जसप्रीत बुमराह को गेंद थमाई, लेकिन बटलर और स्टोक्स के आगे उनका
हर दांव बेअसर साबित हो रहा था.
लंच के बाद चायकाल का सत्र बटलर और
स्टोक्स के नाम रहा और भारतीय गेंदबाज़ ओवर द विकेट और राउंड द विकेट
गेंदें फेंककर अंग्रेज़ बल्लेबाज़ों के धैर्य का इम्तहान लेते रहे.
80
ओवर के बाद इंग्लैंड टीम का स्कोर 223 रन पहुँच गया था. कप्तान कोहली,
ईशांत शर्मा और मोहम्मद शमी के दिमाग़ में पाँच साल पहले जोहानेसबर्ग की
याद ताज़ा हो गई होंगी, जब दक्षिण अफ्रीका दूसरी पारी में सात विकेट पर 450
के स्कोर तक पहुँच गया था.
यही नहीं, कोहली, शमी और इशांत शर्मा
चार साल पहले वेलिंगटन में उस मैच के बारे में भी सोच रहे होंगे, जब
न्यूज़ीलैंड की दूसरी पारी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. फरवरी 2014
से खेले गए इस टेस्ट मैच की दूसरी पारी में न्यूज़ीलैंड के पाँच विकेट 94
रनों पर गिर गए थे और भारत जीत की उम्मीदें संजोने लगा था, लेकिन फिर
ब्रैंडन मैकुलम (302), वाल्टिंग (124) और नीशाम (137) ने खूंटा गाड दिया और
आठ विकेट पर 680 रन बनाने के बाद पारी घोषित की थी.
पारी के 81वें ओवर में विराट कोहली ने नई गेंद लेने का फ़ैसला किया और
गेंद बुमराह को थमा दी. बुमराह का ये ओवर मेडन रहा और दूसरे छोर पर कोहली
ने पहली पारी में पांच विकेट चटकाने वाले पांड्या को लगाया. कोहली का ये
दांव काम आया और बुमराह ने अगले ही ओवर में बटलर को एलबीडब्ल्यू आउट कर
दिया. अगली ही गेंद पर बुमराह ने जॉनी बेरिस्टो को बोल्ड कर दिया.
86वें
ओवर में पांड्या ने गेंद को लेगस्टंप के बाहर पटका, स्टोक्स ने मिडविकेट
की तरफ़ शॉट खेलने की इरादा किया, लेकिन गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेते
हुए दूसरी स्लिप में केएल राहुल के हाथों में पहुँच गई. और इस तरह कप्तान
कोहली ने राहत की सांस ली.
लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी का 89 साल की उम्र में सोमवार को कोलकाता के निजी अस्पताल में निधन हो गया.
सोमनाथ
चटर्जी को रविवार को दिल का दौरा पड़ा था. इस आघात के बाद उन्हें कोलकाता
के एक निजी अस्पताल में वेंटिलेशन पर रखा गया था. पश्चिम बंगाल में मंत्री
रहे सीपीएम नेता अब्दुस सत्तार ने बीबीसी को बताया कि सोमवार सुबह 8.15
बजे सोमनाथ चटर्जी ने इस दुनिया को अलविदा कहा.
वो किडनी की समस्या से भी जूझ रहे थे. चटर्जी को जून में भी स्ट्रोक आया था और वो एक महीने तक अस्पताल में भर्ती रहे थे.
सोमनाथ चटर्जी सीपीएम के दिग्गज नेता थे, लेकिन बाद में उन्हें पार्टी ने निकाल दिया था.
सोमनाथ चटर्जी जाने-माने क़ानूनविद् भी थे. वो भारत के सबसे लंबे समय तक
सांसद रहे. 1971 से 2009 तक सोमनाथ चटर्जी लोकसभा सांसद चुने गए. इस दौरान
जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र से 1984 में केवल एक बार उन्हें ममता बनर्जी से
हार का सामना करना पड़ा था.
चटर्जी 1968 में सीपीआई (एम) में शामिल हुए थे और 2008 में पार्टी से
निकाले जाने तक रहे. सीपीएम ने यूपीए वन सरकार के कार्यकाल में अमरीका के
साथ परमाणु समझौते पर उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के लिए
कहा था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था.
सोमनाथ
चटर्जी 10 बार लोकसभा सांसद चुने गए. चटर्जी का जन्म 25 जुलाई, 1929 को हुआ
था. चटर्जी के पिता एनसी चटर्जी हिन्दू महासभा से जुड़े थे. सोमनाथ चटर्जी
ने ब्रिटेन के मिडल टेंपल से बैरिस्टर की पढ़ाई की थी. चटर्जी ने पहली बार
1971 में लोकसभा चुनाव लड़ा था. इमेज कॉपीरइटGetty Imagesदिलचस्प है कि उन्होंने अपने पिता की मौत से ख़ाली हुई सीट पर चुनाव
लड़ा था. पश्चिम बंगाल के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से चटर्जी ने चुनाव
लड़ा. इनमें बर्दवान, बोलपुर और जाधवपुर शामिल हैं. ममता बनर्जी ने 1984
में कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सोमनाथ चटर्जी को पटखनी दी थी. ममता ने
पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था.
सोमनाथ चटर्जी का आदर सभी पार्टियों
में था. वो कई संसदीय समिति के सदस्य रहे. 1996 में उन्हें बेहतरीन सांसद
का अवॉर्ड मिला था. लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर भी सोमनाथ चटर्जी की तारीफ़
होती थी. सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद चटर्जी राजनीतिक हालात पर
बेबाक टिप्पणी करते थे.
चटर्जी ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस
की बढ़ती लोकप्रियता को लेकर सीपीएम को आगाह किया था और आख़िरकार ममता ने
2011 में सीपीएम को सत्ता से उखाड़ फेंका. चटर्जी ने प्रकाश करात के
नेतृत्व वाली सीपीएम की भी आलोचना की थी.बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
कपिल अपना अनुभव साझा करते हुए कहते हैं,
''मैं नौकरी के सिलसिले में लखनऊ से दिल्ली आया था और अक्सर बस से सफ़र
करता था. इसी तरह एक दिन एक अधेड़ उम्र के आदमी ने मुझे अपने पास बैठने के
लिए सीट दी. मैं भी ख़ुशी-ख़ुशी बैठ गया, लेकिन थोड़ी देर बाद वह आदमी मेरे
प्राइवेट पार्ट की तरफ अपना हाथ लगाने लगा. मुझे लगा बस में भीड़ है, इस
वजह से शायद उनका हाथ लग गया हो, लेकिन वे लगातार ऐसी हरकत करते रहे. मैं
किसी को कुछ बता भी न पाया. चुपचाप सहता रहा.''
लेकिन ये पूछे जाने
पर कि आख़िर लड़के इस तरह की घटना में चुप क्यों रहते हैं, कपिल बेझिझक
बताते हैं, "इसके पीछे एक तरह का डर होता है. डर इस बात का कि दोस्तों के
बीच मेरी छवि एक कमज़ोर पुरुष वाली न बन जाए. ऐसा इसलिए भी क्योंकि हमारा
समाज लड़कों को शुरुआत से ही ताकतवर, मज़बूत, कभी ना रोने वाला जैसे
विशेषणों में ढाल देता है."
बिक्रम और कपिल के साथ सार्वजनिक स्थानों पर हुई इस तरह की छेड़छाड़ की तस्दीक़ दूसरे पुरुष भी करते हैं.आख़िर ऐसी क्या वजह है कि यौन उत्पीड़न के शिकार पुरुष अपने साथ हुई घटनाओं को अक्सर छिपाते हैं.
दिल्ली
में मनोचिकित्सक डॉक्टर प्रवीण त्रिपाठी भी कपिल की बात से सहमति जताते हैं. बीबीसी से बातचीत में डॉ. प्रवीण कहते हैं, "इसके पीछे सबसे बड़ी वजह
शर्मिंदगी का डर होता है. पुरुषों को लगता है कि उनके दोस्त या परिजन उन पर
हंसेंगे. पुरुषों के भीतर घर कर गई तथाकथित मर्दानगी की भावना भी उन्हें
अपने साथ हुई छेड़छाड़ की घटना को साझा करने से रोकती है."
पुरुषों
के साथ सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले यौन उत्पीड़न के मामलों में एक और बात जो निकलकर आती है, वह यह कि इस तरह की हरकतें करने वालों में ख़ुद
पुरुष ही शामिल रहते हैं.इन पुरुषों की मानसिकता के बारे में डॉ.
प्रवीण कहते हैं कि ये लोग 'फ़्रोटेरिज़्म' नामक बीमारी के शिकार होते हैं. इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के जेनेटिकल पार्ट को
छूने से एक तरह की यौन संतुष्टि प्राप्त करता है. इसके लिए वह दूसरे
व्यक्ति की सहमति भी नहीं मांगता.
डॉ. प्रवीण कहते हैं, ''यौन उत्पीड़न के अधिकतर मामले अपनी ताक़त
दर्शाने की कोशिश होती है. पुरुषों के ज़रिए पुरुषों के यौन उत्पीड़न के
मामलों में ताक़त का प्रदर्शन और ज़्यादा हो जाता है.''ऐसी कई
रिपोर्ट भी हैं जिनसे यह पता चला है कि पुरुषों के ज़रिए पुरुषों का रेप करने की घटनाओं में यौन सुख प्राप्त करने की बजाय अपनी ताक़त दर्शाना बड़ी वजह रही है. महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न का जितना असर उन पर
पड़ता है, ठीक वैसा ही असर पुरुषों पर भी होता है.
डॉक्टरों का मानना है कि कई बार इस ट्रॉमा से बाहर निकलने में उन्हें सालों लग सकते हैं.कपिल
कहते हैं, ''मैं आज भी इस तरह की घटनाओं को याद कर सिहर जाता हूं और चाहता हूं कि मेरी आने वाली पीढ़ी को यूं घुट-घुटकर ना रहना पड़े. वह खुलकर अपने
साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की शिकायत करें.''